कोरियाछत्तीसगढ़

*सोनहत के तुर्रीपानी गांव में दशकों बाद बुझी प्यास, नल-जल योजना से पहुँचा पानी*

 

कोरिया -जिले के सोनहत विकास की दौड़ में अक्सर पीछे छूट जाने वाले वनांचल क्षेत्रों से आज एक बेहद सुखद और भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। विकासखंड सोनहत के ग्राम तुर्रीपानी में आजादी के दशकों बाद और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार लगभग 450 साल का सूखा खत्म हुआ है। जल जीवन मिशन के तहत ‘नल-जल योजना’ के जरिए अब ग्रामीणों के सोलर पम्प के जरिये पानी मिल गया है।

 

पीढ़ियां गुजरीं, पर अब खत्म हुआ पानी का संकट..

तुर्रीपानी गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि उनके पूर्वजों के समय से ही गांव में पानी की भारी किल्लत थी। ग्रामीण अब तक पीने के पानी के लिए मीलों दूर स्थित झरिया पहाड़ी का तुर्रा असुरक्षित जल स्रोतों पर निर्भर थे। पथरीली जमीन और भौगोलिक विषमताओं के कारण यहाँ कुआं खोदना या हैंडपंप लगाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही थी।

 

गांव में जश्न का माहौल..

जैसे ही गांव के नलों से पानी की पहली धार निकली, ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई। महिलाओं ने नलों की पूजा की और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर इस उपलब्धि का जश्न मनाया।

 

 ग्रामीणों का कहना है..

“हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारे जीते-जी घर के आंगन में नल लगेगा। अब हमें पानी के लिए पहाड़ों और ढलानों पर नहीं भटकना पड़ेगा।”

 

स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद..

शुद्ध पेयजल मिलने से अब गांव में जलजनित बीमारियों के खतरे में भी भारी कमी आने की संभावना है।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) और अधिकारियों के मुताबिक, इस योजना का लक्ष्य हर घर तक स्वच्छ और पर्याप्त जल पहुँचाना है ताकि ग्रामीणों का जीवन स्तर बेहतर हो सके।

लेकिन जमीनी सच्चाई तो ये है की आज भी ऐसे कई गांव हैँ जहाँ पर स्वच्छ पीने का पानी लोगों नहीं मिल पा रहा है।

 

समस्या का स्थायी निदान या फिर हलाकान..

भले ही पानी की धार कमजोर है लेकिन गांव वाले की खुशियाँ बुलंद है अब देखना ये है की क्या विभाग गांव वाले की इस खुशी को स्थिरता प्रदान करता है या इन गांव वालों की खुशी सिर्फ क्षणिक मात्र की होगी इस दूरस्थ वानंचल ग्राम मे समय-समय पर देखभाल करने विभाग कितनी तत्परता दिखता है।

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